Sunday, June 07, 2026

धर्म के लक्षण

 

धृति: क्षमा दमोऽस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह:।
धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌।। (मनुस्‍मृति ६.९२)

धर्म के 10 मूल लक्षण :
  1. धृति (धैर्य): हर परिस्थिति में विचलित न होकर साहस और संयम बनाए रखना。
  2. क्षमा (क्षमाशीलता): दूसरों की गलतियों को माफ करना और बदले की भावना न रखना。
  3. दम (आत्म-नियंत्रण): अपने मन, विचारों और बुरी आदतों पर काबू पाना。 
  4. अस्तेय (चोरी न करना): दूसरों की संपत्ति या हक़ का अनुचित तरीके से लालच न करना。 
  5. शौच (पवित्रता): तन, मन और विचारों की शुद्धता और स्वच्छता बनाए रखना。 
  6. इन्द्रिय-निग्रह (संयम): अपनी वासनाओं और इंद्रियों को सही दिशा में लगाना。 
  7. धी (बुद्धि): सात्विक कार्यों से अपनी बुद्धि और विवेक का विकास करना。
  8. विद्या (ज्ञान): सत्य, असत्य और यथार्थ का ज्ञान प्राप्त करना。 
  9. सत्य (सत्यनिष्ठा): सदैव सच का आचरण करना और सत्य के मार्ग पर चलना。 
  10. अक्रोध (क्रोध न करना): क्रोध से दूर रहना और शांतिपूर्ण व्यवहार करना。